मोबाइल कैमरा सेटिंग्स हिंदी में: मैनुअल मोड आसान भाषा में
प्रो या मैनुअल मोड आपको चार सेटिंग्स देता है: शटर स्पीड, ISO, व्हाइट बैलेंस और फ़ोकस। यहाँ जानिए कि फ़ोन पर हर सेटिंग क्या करती है, उसे ऑटो से कब हटाएँ, और रोज़ाना के सीन के लिए कहाँ से शुरू करें।
फ़ोन पर क्या अलग है
बड़े कैमरे में फ़ोटो की रोशनी (ब्राइटनेस) तीन सेटिंग्स से तय होती है: अपर्चर, शटर स्पीड और ISO। ज़्यादातर फ़ोन के लेंस का अपर्चर फ़िक्स्ड होता है, इसलिए फ़ोन पर ब्राइटनेस सिर्फ़ दो सेटिंग्स से कंट्रोल होती है: शटर स्पीड और ISO। इनके साथ व्हाइट बैलेंस और फ़ोकस आते हैं। कुल चार सेटिंग्स, और हर एक का अपना काम।
चारों को एक साथ सेट करना ज़रूरी नहीं है। ज़्यादातर मैनुअल या प्रो मोड में किसी भी सेटिंग को ऑटो पर छोड़ा जा सकता है। सीखने का अच्छा तरीका है: एक बार में एक ही सेटिंग को ऑटो से हटाएँ।
शटर स्पीड: मोशन और ब्लर
शटर स्पीड का मतलब है कि हर फ़ोटो के लिए सेंसर कितनी देर तक रोशनी इकट्ठा करता है। इसे सेकंड के हिस्से में लिखा जाता है, जैसे 1/125।
- तेज़ (1/500 सेकंड या उससे तेज़): चलती चीज़ों को रोक देती है, जैसे खेल, पालतू जानवर, उछलता पानी। इसमें रोशनी कम आती है, इसलिए ज़्यादा ISO या ज़्यादा रोशनी चाहिए।
- मीडियम (1/60 से 1/250 सेकंड): रोज़ाना हाथ में पकड़कर फ़ोटो लेने के लिए।
- धीमी (1/15 सेकंड या उससे धीमी): बहुत ज़्यादा रोशनी आती है, और जो भी हिलता है वह ब्लर हो जाता है: रेशमी झरना, गाड़ियों की लाइट की लकीरें, और आपके हाथ का हिलना भी। लगभग 1/15 सेकंड से धीमे पर फ़ोन को किसी चीज़ पर टिकाएँ, या सेल्फ़-टाइमर के साथ ट्राइपॉड लगाएँ।
शटर का समय आधा करने पर (जैसे 1/60 से 1/125) रोशनी भी आधी हो जाती है, जिसकी भरपाई ISO बढ़ाकर की जाती है।
ISO: ब्राइटनेस, लेकिन नॉइज़ की कीमत पर
ISO सेंसर के सिग्नल को बढ़ाता (एम्प्लिफ़ाई करता) है। ISO दोगुना करने से फ़ोटो उतनी ही ब्राइट होती है जितनी शटर का समय दोगुना करने से, लेकिन इससे नॉइज़ (दाने) भी बढ़ते हैं। फ़ोन के छोटे सेंसर पर नॉइज़ जल्दी दिखता है, इसलिए:
- जितनी शटर स्पीड चाहिए, उसके साथ सबसे कम ISO रखें;
- अच्छी रोशनी में अपने फ़ोन के सबसे कम ISO के पास रहें, आमतौर पर 50 से 100 के आसपास;
- कम रोशनी में चुनना पड़ता है: स्थिर फ़ोन के साथ धीमा शटर (साफ़ फ़ोटो), या ज़्यादा ISO (शार्प, लेकिन ज़्यादा दानेदार)।
व्हाइट बैलेंस: सफ़ेद को सफ़ेद दिखाना
रोशनी का भी रंग होता है। घर के बल्ब नारंगी होते हैं, छाँव नीली, और दिन की रोशनी बीच में। व्हाइट बैलेंस कैमरे को बताता है कि रोशनी किस रंग की है, ताकि वह उसे ठीक कर सके। इसे केल्विन (K) में मापा जाता है:
| रोशनी | लगभग |
|---|---|
| मोमबत्ती, घर के गर्म (पीले) बल्ब | 2,000 से 3,000 K |
| आम इनडोर लाइट | 3,000 से 4,000 K |
| दिन की रोशनी, फ़्लैश | 5,000 से 6,000 K |
| बादल वाला आसमान, खुली छाँव | 6,500 से 8,000 K |
नंबर को रोशनी के हिसाब से सेट करें, तो सफ़ेद चीज़ें सफ़ेद आएँगी। रोशनी से कम सेट करें तो फ़ोटो नीली हो जाती है, ज़्यादा सेट करें तो गर्म (पीली-नारंगी)। यह सिर्फ़ सुधार नहीं, एक क्रिएटिव चुनाव भी है।
ऑटो व्हाइट बैलेंस अच्छा है, लेकिन सीन बदलने पर यह हर फ़ोटो में, या वीडियो के बीच में, बदल सकता है। हाथ से सेट करने पर पूरी सीरीज़ एक जैसी रहती है। अगर आप RAW में शूट करते हैं, तो इसे बाद में भी बदल सकते हैं।
फ़ोकस: कैमरे को बताएँ कि क्या ज़रूरी है
- टैप टू फ़ोकस: अपने सब्जेक्ट पर टैप करें। जब कैमरा बैकग्राउंड पर फ़ोकस कर ले, तो यह सबसे जल्दी का इलाज है।
- फ़ोकस और एक्सपोज़र लॉक करें (अक्सर AE/AF लॉक कहलाता है), जब आप फ़्रेम बदलना चाहें और कैमरा अपना फ़ैसला न बदले।
- मैनुअल फ़ोकस डिस्टेंस तब काम आता है जब ऑटोफ़ोकस परेशान करे: अंधेरे में, काँच के पार, बहुत पास से, या लैंडस्केप और रात के आसमान के लिए, जहाँ इसे सबसे दूर (इनफ़िनिटी) पर रखें।
आम सीन के लिए शुरुआती सेटिंग्स
ये शुरुआत के लिए हैं, नियम नहीं। एक फ़ोटो लें, देखें, और एक बार में एक ही सेटिंग बदलें।
| सीन | शटर | ISO | टिप |
|---|---|---|---|
| तेज़ धूप | 1/1000 से 1/4000 सेकंड | सबसे कम | आसमान पर नज़र रखें। सफ़ेद हो जाए तो एक्सपोज़र कम करें। |
| बच्चे, पालतू जानवर, खेल | 1/500 सेकंड या तेज़ | ऑटो, या जितना चाहिए | नॉइज़ से ज़्यादा ज़रूरी है कि मोशन रुके: शटर तेज़ रखें। |
| घर के अंदर | 1/60 से 1/125 सेकंड | 400 से 1600 | व्हाइट बैलेंस लगभग 3,200 से 4,000 K रखें। |
| झरना या नदी | 1/4 से 1 सेकंड | सबसे कम | फ़ोन को टिकाएँ, सेल्फ़-टाइमर ऑन। छाँव, शाम या ND फ़िल्टर चाहिए: दिन की धूप में फ़ोटो बहुत ब्राइट हो जाएगी। |
| रात की सड़क | 1/15 से 1/30 सेकंड | 800 से 3200 | फ़ोन को किसी चीज़ से टिकाएँ, या नाइट मोड इस्तेमाल करें। देखें रात की फ़ोटो (अंग्रेज़ी में)। |
सबसे लंबी शटर स्पीड और सबसे ज़्यादा ISO आपके फ़ोन के हार्डवेयर पर निर्भर करते हैं, और अलग-अलग फ़ोन में, यहाँ तक कि एक ही फ़ोन के अलग लेंस में भी, अलग होते हैं।
One Camera में मैनुअल कंट्रोल
फ़्री वर्ज़न में भी One Camera टैप टू फ़ोकस, एक्सपोज़र स्लाइडर और AE/AWB लॉक देता है। मैनुअल फ़ोटो और प्रो वीडियो, जो One Camera Pro का हिस्सा हैं, ISO, शटर स्पीड, फ़ोकस डिस्टेंस और व्हाइट बैलेंस को असली डायल पर देते हैं। One Camera आपके फ़ोन से पूछता है कि वह क्या सपोर्ट करता है और सिर्फ़ वही दिखाता है, इसलिए डायल पर वही रेंज आती है जो आपका हार्डवेयर सच में कर सकता है। हर Pro फ़ीचर पर लॉक या PRO टैग होता है, ताकि आपको हमेशा पता रहे कि क्या फ़्री है।
सवाल-जवाब
फ़ोन से फ़ोटो के लिए सबसे अच्छा ISO कौन सा है?
सबसे कम ISO, जिसके साथ शटर स्पीड काफ़ी तेज़ रहे। अच्छी रोशनी में यह आपके फ़ोन का बेस ISO है, आमतौर पर 50 से 100 के आसपास। ISO तभी बढ़ाएँ जब वरना शटर इतना धीमा हो जाए कि फ़ोन स्थिर न रख सकें।
फ़ोन पर कौन सी शटर स्पीड इस्तेमाल करें?
हाथ में पकड़कर रोज़ाना की फ़ोटो के लिए लगभग 1/60 सेकंड या तेज़। चलती चीज़ों के लिए 1/500 सेकंड या तेज़। 1/15 सेकंड से धीमा सिर्फ़ तब, जब फ़ोन किसी चीज़ पर टिका हो।
मेरे फ़ोन में अपर्चर की सेटिंग क्यों नहीं है?
ज़्यादातर फ़ोन के लेंस का अपर्चर फ़िक्स्ड होता है, इसलिए बदलने को कुछ नहीं है। ब्राइटनेस शटर स्पीड और ISO से कंट्रोल होती है।
घर के अंदर कौन सा व्हाइट बैलेंस रखें?
आम इनडोर लाइट के लिए लगभग 3,200 से 4,000 K से शुरू करें, फिर आँख से ठीक करें: फ़ोटो नारंगी लगे तो कम करें, नीली लगे तो बढ़ाएँ।